PeepingMoon 2020: जयदीप अहलावत से लेकर प्रतीक गांधी तक, ये एक्टर्स अपनी दमदार परफॉर्मेंस के बलबूते बने वेब शोज में 'बेस्ट'

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साल 2020 में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक के बाद एक जोरदार और शानदार वेब सीरीज लगातार रिलीज हुई. OTT पर ख़ूब सारा बढ़िया कॉन्टेंट. कोरोना काल में थियेटर बंद हुए, तो वेब सीरीज़ ने ‘काउच पोटैटो’ लोगों का जमकर साथ निभाया. दर्शकों ने दमदार कहानी और किरदारों को हाथों हाथ लिया. वहीं हम अपने इस स्पेशल सेगमेंट में हम आपको बताएंगा उन टॉप एक्टर्स के बारे में जिन्होने अपने दम पर पूरी वेब सीरीज को सम्भाला साथ ही अपनी एक्टिंग से सीरीज को जबरदस्त पंच देते हुए अपने किरदार से दर्शकों की बीच अपनी अलग पहचान बनाई. आइये नजर डालते है साल 2020 के बेस्ट एक्टर्स इन वेब सीरीज की लिस्ट पर. 

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गुलशन दैवया: अफसोस 
वेब सीरीज अफसोस में गुलशन ने नकुल नाम के मुंबई बेस्ड राइटर का किरदार निभाया था. सीरीज में नकुल खुद को 11 बार मारने का प्रयास करता है, लेकिन हर बार नाकामयाब हो जाता है. दरअसल नकुल  एक काफी परेशान किरदार है, उसे चार बार नौकरी से निकाल दिया जाता है, इसके अलावा वह एक असफल राइटर भी है. आखिरकार थक्कर नकुल खुद को मारने के लिए एक एजेंसी से संपर्क करता है.सीरीज की कहानी में काफी उतार-चढ़ाव थे. सीरीज में नकुल ने अपनी परफॉर्मेंस से दिल जीत लिया. उनकी बॉडी लैंग्वेज उनके एक्सप्रेशन सब कमाल के थे. गुलशन अपने इस किरदार में परफेक्टली फिर बैठे थे.

अरशद वारसी और बरुन सोबती : असुर
अरशद वारसी और बरुन सोबती स्टारर वूट सेलेक्ट की वेब सीरीज 'असुर' को दर्शकों ने काफी पसंद किया. इस वेब सीरीज में साइंस और माइथोलॉजी को मिलाकर एक ऐसी कहानी दिखाने की कोशिश की गई थी, जिसे पर देखना दर्शकों के लिए यकीनन काफी मजेदार साबित हुआ. हिंदू धर्म में असुरों को एक खास जगह प्राप्त है. इस सीरीज में भी असुरों की उत्पत्ति से लेकर उनके अस्तित्व की कहानी बयां करने की कोशिश की गई थी. ये कहानी साइंस और धर्म के बीच के संबंध को बयां करती थी.  इसमें जहां एक ओर विज्ञान सही लगने लगता है तो दूसरी ओर धर्म. लेकिन अंत तक आते-आते आपको ये समझ आने लगेगा कि असल में सही और गलत तो कुछ होता ही नहीं है. सही मायनो में ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. जिसे हर कोई अपनी जरूरत के हिसाब से सही मानने लगता है. ये कहानी फॉरेंसिक एक्सपर्ट निखिल (बरुन सोबती), सीबीआई ऑफिसर धनंजय राजपूत (अरशद वारसी) की इर्ध गिर्ध बुनी गई थी. निखिल और अरशद के बीच अपने काम के चलते कुछ दूरियां हैं. सीरियल किलिंग के एक खौफनाक सिलसिले के साथ सीरीज काफी इंट्रेस्टिंग थी. 
बरुन सोबती सीरीज की जान थे. बरुन ने अपने किरदार को शानदार तरीके से प्ले किया. बरुन के किरदार में कई लेयर्स रखी गई थी और वो अपने किरदार की इन सभी कमियों और खासियतों को अपने अभिनय के जरिए दर्शकों तक पहुंचाने में कामयाब दिखे. 


वहीं अभिनय के लिहाज से अरशद वारसी ने अपने डिजिटल डेब्यू में शानदार काम किया. सीरीज में अरशद का असली टैलेंट देखने को मिला. उन्होने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया. सीरीज में अरशद की संजीदा अभिनय की तारीफ करनी चाहिए. 

केके मेनन: स्पेशल ऑप्स 
'स्पेशल 26', 'बेबी' और 'ए वेडनेसडे' जैसी फ़िल्में बना चुके निर्देशक नीरज पांडेय ने अपना डिजिटल डेब्यू करते हुए हॉटस्टार की वेब सीरीज़ 'स्पेशल ऑप्स' को डायरेक्ट किया था. नीरज पांडेय एक बार फिर अपना असर छोड़ने में कामयाब रहे. वेब सीरीज़ की कहानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के ऑफ़िसर हिम्मत सिंह (केके मेनन) के इर्द-गिर्द बुनी गई है.  हिम्मत सिंह के ऊपर  बिना किसी स्त्रोत के ज्यादा खर्च करने का आरोप है.  इसके लिए वह एक कमेटी की सामना कर रहा है. वह 2001 में हुए संसद पर हमले और मुंबई ब्लास्ट जैसे मामलों की जांच भी कर रहा है. उसे इकलाख ख़ान नाम के एक आंतकवादी की तलाश है, जो कि इन हमलों के पीछे का मास्टरमाइंड है. साल 2001 में वह हिम्मत सिंह के हाथ आने से बच गया था, तब से वह इसकी तलाश में है. पूरी सीरीज़ में केके मेनन की एक्टिंग इतनी रियल और शानदार थी, कि हर वक़्त उन्हें ही देखने का मन करेगा. केके मेनन एक रॉ अफसर के किरदार में बहुत जमे थे. पूछताछ के सीन, रॉ वाला रौब, प्लानिंग, डायलॉग और बीच-बीच में दिल्ली वाली गालियां केके मेनन ने इस किरदार में पूरी जान डाल दी थी. 

जितेंद्र कुमार: पंचायत
वेब सीरीज की कहानी एक शहर के लड़के अभिषेक त्रिपाठी (जितेंद्र कुमार) की. . जो इंजिनियर है और उसकी नौकरी लगती है एक ग्राम पंचायत में सचिव के तौर पर और वो भी महज 20 हजार तनख्वाह में. खैर, अभिषेक को वो नौकरी करनी तो नहीं, और सही बात भी है शहर का एक लड़का महज 20 हजार की नौकरी के लिए गांव क्यों जाएगा. पर हाथ में कोई और काम न होने कारण अभिषेक ने सोचा घर बैठने से तो अच्छा है नौकरी ही कर ले. अभिषेक का दोस्त प्रतीक (बिस्वापति सरकार) भी उसे ये ही सलाह देता है. तो अभिषेक सामान बांध कर बस से निकल पड़ता है गांव फुलेरा, जहां उसकी नौकरी लगी है. बस फिर क्या जैसे ही वो फुलेरा में कदम रखता है मुश्किलें पलकें बिछाए उसका इंतजार कर रही होती हैं. अब अभिषेक गांव पहुंच तो जाता है लेकिन वहां मन नहीं लगता. उसका दोस्त उसे CAT के एग्जाम की तैयारी के लिए कहता है और बोलता है कि अगर अच्छी नौकरी चाहिए तो MBA करो. बस फिर क्या गांव से निकलने की लालसा और ज्यादा पैसे कमाने का जोश अभिषेक के सर चढ़ जाता है. वो खूब मेहनत करता है. इस दौरान अभिषेक की जिंदगी में बहुत रुकावटें आती हैं. एक तो ऑफिस का काम, दूसरा ये कि गांव है, बिजली तो हमेशा मिलेगी नहीं. तो जब बिजली नहीं तो आदमी पढ़े तो पढ़े कैसे. वेब सीरीज की कहानी बिल्कुल रोलरकोस्टर राइड की तरह है. इमोशनल, सोशल मैसेज, गुस्सा, फ्रस्ट्रेशन, यूनिटी, कॉमेडी, एक्शन सब देखने को मिला था. सीरीज में जितेंद्र की एक्टिंग बेहद ही उम्दा थी. उनको स्क्रीन पर देखना हमेशा ही अच्छा लगता है.

वीर दास: हसमुख
वेब सीरीज़ की कहानी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के हसमुख (वीर दास) के आस पास बुनी गई है, जो अपने गुरु गुलाटी के गुलाम जैसा होता है. उसकी ना तो घर में इज्ज़त है और ना ही स्टेज़ पर. इसके बाद एक दिन उत्तेजना में आकर वह अपने गुरु गुलाटी की हत्या कर देता है. फिर वह पहली बार स्टेज़ पर आता है और लोगों को हंसाना शुरू करता है. इस कड़ी में उसकी मुलाकात गुलाटी के मैनेजर जिम्मी द मेकर से होती है. वह उसके लिए शोज़ की व्यवस्था करता है. लेकिन हसमुख की एक समस्या है कि बिना हत्या किए वह कॉमेडी नहीं कर सकता है. इसका जुगाड़ जिम्मी करता है. एक दिन उसका वीडियो वायरल होता है और वह मुंबई के एक टीवी शो में पहुंच जाता है. वहां, उसके पीछे पुलिस पड़ जाती है. एक तरफ शो हैं, दूसरी तरफ हत्याएं. ये ही सब सीरीज में दिखाया गया है. सीरीज की सबसे ख़ास बात ये थी कि इस सीरीज़ में एक अगल किस्म का प्रयोग किया गया है. स्टैंडअप और ड्रामा को एक साथ लाने का प्रयास किया गया. वीर दास अपने किरदार में जमे है. वीर ने अपने साइको डार्क कैरेक्टर को बहुत शानदार और इमानदारी से निभाया. वीर अपने किरदार में एक दम परफ्केट लगते हैं. उन्होंने स्टैंडअप कॉमेडियन के साथ साइको किलर का किरदार निभाकर शो की लाइमलाइट लूट ली. 


    

जयदीप अहलावत: पाताल लोक
दमदार परफॉर्मेंस और बेबाक कहानी के साथ समाज की कड़वी सच्चाई बयां करती  सुदीप शर्मा की ये सीरीज साल की सबसे पसंदीदा किए जाने वाली सीरीज में से एक है. सीरीज में जयदीप अहलावत ने हाथीराम चौधरी नाम के पुलिस ऑफिसर का किरदार निभाया था. जिसकी दिल्ली के आउटर जमुनापार थाने में पोस्टिंग है. हाथीराम की वाट्सअप यूनिवर्सिटी के मुताबिक,  दुनिया में तीन लोक हैं. स्वर्ग लोक- जहां बड़े लोग रहते हैं. धरती लोक- जहां वह रहता है. पाताल लोक- जहां उसकी पोस्टिंग है. हाथीराम के इलाके में एक ब्रिज है. दिल्ली पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन में इस ब्रिज पर चार क्रिमनल गिरफ्तार होते हैं. यह केस हाथीराम को सौंपा जाता है. केस में कई पहलू हैं, जिसे हाथीराम को सुलझाना है. हाथीराम ना सिर्फ पुलिस डिपार्टमेंट को  बल्कि अपने परिवार को भी बताना चाहता है कि वह हीरो है. 
जयदीप अहलावत बिलकुल रंगत में नज़र आए थे. चेहरे पर भाव पानी की तरह उतरे थे. एक परेशान पुलिस वाला, जो घर समाज और ऑफ़िस तीनों जगह लड़ रहा है. उस पुलिस वाले की खुशी, गम और चिंता को जयदीप ने अपने चेहरे पर शिद्दत से उतारा. जयदिर की ये परफोर्मेंस जीवन भर याद रखा जाएगा. जयदीप शो के रियर सुपर मैन थे.

 

अभिषेक बच्चन और अमित साध:  'ब्रीद: इनटू द शैडो' 
सस्पेंस, एक्शन और थ्रिलर से भरपूर अभिषेक बच्चन और अमित साध की वेब सीरीज 'ब्रीद: इनटू द शैडो' को लोगों ने काफी पसंद किया. इस सीरीज के साथ ही अभिषेक बच्चन ने अपना वेब डेब्यू किया. सीरीज में अभिषेक बच्चन ने अविनाश सभरवाल नाम के सफल मनोचिकित्सक का रोल प्ले किया था. इनकी पत्नी नित्या मेनन (आभा) एक शेफ और 6 साल की बच्ची होती है. एक दिन सिया का किडनैप हो जाता है और पुलिस के लाख प्रयास के बाद उनका कुछ पता नहीं लग पाता है. पुलिस ऑफिसर कबीर सावंत (अमित साध) मुंबई से दिल्ली शिफ्ट हो जाते हैं. एक दिन अचानक अविनाश के पास किडनैपर का फोन आता है कि उनकी बेटी सिया ठीक है और उनके पास है, लेकिन बेटी को छोड़ने के बदले वो किडनैपर अविनाश से मर्डर करने के लिए कहते हैं. पहले मर्डर के बाद ये केस कबीर को मिलता है जो कि अपने दाहिने हाथ सब इंस्पेक्टर के साथ मिलकर इस मामले की तफ्तीश में जुट जाता हैं. सस्पेंस, एक्शन और थ्रिलर से भरी ये सीरीज काफी मजेदार है. उससे भी शानदार है एक्टर्स की एक्टिंग.
'ब्रीद: इनटू द शैडो' में आपको सस्पेंस खूब देखने को मिला. वहीं अभिषेक बच्चन का अभिनय शानदार था. एक पिता के रोल को अभिषेक ने बेहतरीन तरीके से निभाया. 


वहीं पुलिस ऑफिसर के रोल में अमित साध 'ब्रीद' में पहले ही आपका दिल जीत चुके हैं और 'ब्रीद: इनटू द शैडो' में भी उनका अभिनय बेजोड़ था. हमेशा कि तरह उन्होने अपने किरदार से न्याय करते हुए बेस्ट की लिस्ट में जगह बनाई. 

दिब्येंदु भट्टाचार्य: अनदेखी 
वेब सीरीज 'अनदेखी' एक सस्पेंस थ्रिलर कहानी है. इसमें एक पुलिस ऑफिसर का सुंदरबन में मर्डर हो जाता है. इसकी छानबीन दिब्येंदु भट्टाचार्य करते है. उन्हें पता चलता है कि यह मर्डर 2 से 3 दिन पहले हुआ है और बॉडी को जानवर खा गए हैं. हत्या का शक शादी और अन्य समारोहों में डांस करने वाली दो आदिवासी लड़कियों पर जाता है, डीएसपी बरुण घोष (दिब्येंदु भट्टाचार्य) उनकी खोज में मनाली पहुंचते है. इसके बाद पता चलता है कि आदिवासी गांव की ये 2 लड़कियां भी गायब है. इस साल के सबसे बड़े सरप्राइजिंग सीरीज अनदेखी कही जाए तो गलत नहीं होगा. हमारे सिस्टम में कितना गहरा भ्रष्टाचार है और कैसे वंचितों को न्याय से वंचित किया जाता है, इसकी एक तस्वीर दिखाते हुए, दिब्येंदु ने शानदार प्रदर्शन किया है. डीसीपी घोष की भूमिका में दिब्येंदु शानदार लगे. उनका अभिनय बहुत रोचक है. उनकी एक खास शैली है,जो जंचती भी है.

नसीरुद्दीन शाह और रित्विक भौमिक: बंदिश बैंडिट्स 
रोमांटिक-ड्रामा सीरीज 'बंदिश बैंडिट्स' में रित्विक भौमिक और नसीरुद्दीन शाह ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थी. यह कहानी संगीत सम्राट राठौर घराने के पं. राधे मोहन राठौर (नसीरुद्दीन शाह) और उनके पोते राधे (रित्विक भौमिक) थी. पंडित जी बहुत सख्त हैं और संगीत को लेकर कोई समझौता नहीं करते. राधे पंडित जी का उत्तराधिकारी बनना चाहता है. ‘जागो मोहन प्यारे’ बंदिश से शुरू हुई यह सीरीज पहले दृश्य में ही मन मोह लेती है. इसमें संगीत जितना बढ़िया है, गायकी भी उतनी ही कर्णप्रिय है. ‘बंदिश बैंडिट्स’ का अंतिम एपिसोड तो शास्त्रीय संगीत का विभोर कर देने वाले कार्यक्रम लगता है. इसका हर कंपोजिशन अभिभूत कर देता है.
नसीरुद्दीन शाह का अभिनय सीरीज को ऊंचाई पर ले जाता है. वह एक संगीत साधक और गुरु की भूमिका में इतने स्वाभाविक दिखते हैं कि लगता ही नहीं, अभिनय कर रहे हैं. इसके अलावा, उनके किरदार का एक कुटिलता भरा पहलू भी है, जो फ्लैशबैक में दिखता है. उसमें भी उन्होंने कमाल का अभिनय किया है.


रित्विक अपने किरदार में एकदम फिट लगते हैं. रित्विक गाते हुए बहुत नेचुरल लगते हैं, जब आलाप लेते हैं, तब वह एकदम वास्तविक गायक की तरह लगते हैं.

बॉबी देओल: आश्रम 
प्रकाश झा अपनी राजनीति, लोकतंत्र, पुलिसिंग, आरक्षण और जाति व्यवस्था को आगे ले जाते हुए, एमएक्स प्लेयर शो आश्रम में असल में भारत के गॉडमैन कल्चर के पीछे की डार्क साइड को दिखाया था, जो जबरन वसूली, शोषण, यौन शोषण और घृणित अपराधों से भरा है. इस वेब सीरीज़ में बॉबी देओल ने काशीपुर वाले बाबा निराला का रोल किया था. बॉबी का मेनिंग एक्ट किसी की कल्पना से अधिक गहरा था. इस तरह से वह किरदार के लिए खुद को सही चॉइस साबित करते हैं.  सीरीज में बॉबी की एक्टिंग ने  काफी तारीफ बटोरी. 

पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु: मिर्जापुर 2
'मिर्जापुर 2' उन सीरीज में से थी, जिसका इंतजार ऑडियंस को दो सालों से था. दूसरे सीजन में एक्शन वहीं से शुरू होता है, जहां से पिछले सीजन खत्म हुआ था. कालीन भैया का टशन, मुन्ना भैया की मिर्जापुर की गद्दी पर बैठने की चाहत लोगों को काफी पसंद आई. पहले सीजन की तरह ही दूसरे में भी पंकज त्रिपाठी यानी कालीन भैया का भोकाल देखने को मिला. अभिनय के मामले में पंकज लाजवाब रहे है. सीजन 1 की तरह इस सीजन में भी मुन्ना भैया अपने किरदार में एकदम फिट लगते हैं. सीरीज में इस बार दिव्येंदु ने काफी तारीफ बटोरी. 

प्रतीक गांधी : स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी
हर्षद मेहता की 'रिस्क से इश्क' करने वाले कहानी को ऑडियंस ने बहुत प्यार दिया है. 'स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी' सोनी लिव पर रिलीज हुई थी. इसकी कहानी से लेकर थीम सॉन्ग को खूब पसंद किया गया. हंसल मेहता ने इस बड़े स्कैम को बड़े ही सलीके से पर्दे पर उतारा और इस ढंग से निर्देशन किया है कि वेब सीरीज़ 'स्कैम 1992' की कहानी कही भी कमज़ोर नहीं पड़ती है. ये वेब सीरीज देबाशीष बसु और सुचेता दलाल की किताब 'द स्कैम' पर आधारित है, जो हर्षद मेहता के शेयर बाजार घोटाले पर लिखी गई हैं. हर्षद मेहता के किरदार में प्रतीक गांधी ने बेहतरीन अभिनय किया. उनकी बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग डिलीवरी और एक्टिंग ने किरदार के साथ पूरा न्याय किया. प्रतीक गांधी ने यहां हर्षद के किरदार को जीवंत कर दिया. ये किरदार उनसे बेहतर कोई नहीं कर सकता था ये कहना गलत नहीं होगा. 


 

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