PeepingMoon Exclusive: डायरेक्टर रणदीप झा ने 'हलाहल' में सचिन खेडेकर और बरुन सोबती के साथ काम करने के अनिभव पर की चर्चा

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ये कहना गलत नहीं होगा कि देश में मौजद शिक्षा तंत्र समाज की सबसे जरूरी होने के साथ ही सबसे भ्रष्ट संस्थाओं में से एक है. ऐसी ही चीजों पर रोशनी डालती है डायरेक्टर रणदीप झा द्वारा डायरेक्ट की गयी 'हलाहल'. बता दें की रणदीप ने इस फिल्म से पहले अनुराग कश्यप को उनकी कई फिल्मों में असिस्ट भी किया है. ऐसे में रणदीप  ने PeepingMoon के साथ आज रिलीज हो चुकी सचिन खेडेकर और बरुन सोबती स्टारर फिल्म 'हलाहल' के रोमांच कहानी से जुड़े कुछ मजेदार सवालों के जवाब दिए हैं.

'हलाहल' नाम किसने चुना था और क्यों?

सही तरह से मुझे नहीं पता कि कौन इस नाम के साथ आया, लेकिन हम जब फिल्म के काम को लेकर चर्चा कर रहे थे जब हमारे पास दो से तीन नाम थे कि क्या हो सकता है. फिर अचानक से 'हलाहल' नाम आया और कहानी के हिसाब से यह सही और अलग तरह का नाम लगा जिसे हमने कभी सुना भी नहीं था. तो इस तरह हम सब ने इस नाम को फाइनल किया.

(यह भी पढ़ें: PeepingMoon Exclusive: 'हलाहल' की रोमांचक कहानी में बॉलीवुड से नहीं बल्कि टीवी और मराठी इंडस्ट्री से स्टार्स को कास्ट करने के पीछे की लेखक जीशान कादरी ने बताई वजह)

फिल्म के लिए बॉलीवुड से जुड़े कास्ट को ना लेकर आपने टीवी और मराठी सिनेमा से एक्टर्स को क्यों लिया? खर कर के बरुन और सचिन खेडेकर को चुनने का कारण?

सचिन इस लिए क्योंकि वह किरदार के लिए फिट थे. जब हम डॉ. शिव के बारे में सोच रहे थे कि कौन इस किरदार में हो सकता है, तब काफी नाम जहन में थे लेकिन उस समय सचिन सर का नाम सबको सही लगा. एक तो वह अनुभवी एक्टर हैं काफी और जिस तरह का किरदार है, उसके लिए हमें उनके जैसे अनुभवी एक्टर की ही जरुरत थी. सचिन सर के अंदर किरदार की ईमानदारी है. वहीं बरुन क्योंकि हम किसी यंग एक्टर को लेना चाहते थे, जिसने कभी इस तरह का किरदार नहीं निभाया हो. इस तरह से बरुन के लिए यह बेहद अलग किरदार था, जैसे कड़क मूछे और हरियाणवी कॉप, तो बरुन की पफोर्मस को लेकर हम लोग बहुत खुश थे क्योंकि उनका परफॉरमेंस बहुत अच्छा लगता है. 

बरुन जो ओरिजिनल चॉकलेट बॉय की इमेज रखते हैं, उन्हें आपने किरदार के हावभाव और इस तरह के मूछों वाले लुक के को अपनाने के लिए कैसे मनाया ?

ये बहुत ही आसान था, हमने उनसे पूछा क्या किरदार के लिए मूछे रख सकते हैं और उन्होंने बड़ी आसानी से हां कह दिया. एक बात कह सकता हूं मैं की सचिन सर और बरुन का ट्रस्ट इस कहानी को लेकर बहुत स्ट्रांग था. हमने उन्हें बस एक बार बताया कि हम क्या दिखाना चाहते हैं और उसके बाद जो हम बोल रहे थे वह फॉलो कर रहे थे. 

'हलाहल' की कहानी आपको दर्शकों को दिखानी है, यह क्यों महसूस हुआ?

इस कहानी को दर्शकों के सामने लाने का सबसे बड़ी वजह थी उसकी स्क्रिप्ट, जिसे बहुत अच्छी तरह से लिखा हुआ है. इस कहानी से ऐसा था कि एक एक्सपेरिमेंट किया जा सकता है. अपने ट्रेलर देखा होगा तो आपको महसूस होगा  की यह स्टेबल बिल्कुल भी नहीं है. तो स्क्रिप्ट पढ़ कर लगा कि हां बहुत अच्छे से लिखी हुई है और इसे किया जा सकता है.

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