दिल्ली HC ने सुशांत सिंह राजपूत के जीवन पर आधारित 'न्याय: द जस्टिस' की रिलीज़ के खिलाफ उनके पिता की याचिका को किया खारिज

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बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के निधन को अब बस कुछ ही दिनों में एक साल का समय होने वाला है. ऐसे में उनके पिता कृष्ण किशोर सिंह द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में एक्टर पर आधारित फिल्म की रिलीज को रोकने की याचिका को खारिज कर दिया गया है.

एक्टर के पिता ने अपनी याचिका में बेटे के जीवन की कहानी पर बन रही फिल्म, या फिर किसी अन्य फिल्म जिसमे एक्टर के नाम का इस्तेमाल किया जाये, या फिर उनसे मिलते – जुलते किरदार बनाया जाता है तो, उसपर रोक लगाई जाये. याचिका ने  ‘न्याय: द जस्टिस’, ‘सुसाइड ऑर मर्डर : ए स्टार वाज लॉस्ट’, ‘शशांक’ और अनटाइटल्ड फिल्म का जिक्र किया गया, और इनपर आरोप लगाया गया है कि सभी एक्टर के जीवन पर आधारित हैं.

(यह भी पढ़ें: 'राब्ता' की रिलीज को हुए चार साल, कृति सेनन ने सुशांत सिंह राजपूत के लिए शेयर किया इमोशनल नोट )

हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को दिवंगत बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के जीवन पर आधारित फिल्म न्याय: द जस्टिस की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने फिल्म और अन्य उपक्रमों के खिलाफ सुशांत के पिता कृष्ण किशोर सिंह द्वारा उनके बेटे के नाम या समानता का बायोपिक या कहानी के रूप में उपयोग करने के खिलाफ दायर एक आवेदन को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि निजता का अधिकार न केवल मृतक का बल्कि उसके परिवार का भी है. अदालत ने कहा, "इस पहलू पर प्रस्तुतियाँ अनिर्दिष्ट और अस्पष्ट हैं. वादी द्वारा यह दिखाने के लिए कोई निश्चित उदाहरण प्रस्तुत नहीं किया गया है कि इस अधिकार का उल्लंघन कैसे किया जाता है और इसलिए, याचिका में कोई दम नहीं है."

कोर्ट ने आगे कहा, "चूंकि प्रतिवादी की फिल्मों को न तो एक बायोपिक के रूप में चित्रित किया गया है, न ही एसएसआर के जीवन में जो कुछ हुआ उसका एक तथ्यात्मक वर्णन है और इसे पूरी तरह से काल्पनिक और कुछ घटनाओं से प्रेरित दिखाया गया है जो अतीत में हुई हैं और व्यापक रूप से चर्चा की गई हैं और हैं सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है, अदालत को एक रोक लगाने का आदेश देने का कोई कारण नहीं मिलता है."

राजपूत के पिता द्वारा दायर मुकदमे में फिल्म निर्माताओं से राजपूत के परिवार को "प्रतिष्ठा, मानसिक आघात और उत्पीड़न" के नुकसान के लिए 2 करोड़ रुपये से अधिक का हर्जाना मांगा गया था. 

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